बरसात के मौसम में होने वाली बीमारियाँ उनके लक्षण, और बचाव के तरीके - Monsoon Disease Symptoms, Safety And Cure

बरसात के मौसम में होने वाली बीमारियाँ उनके लक्षण, और बचाव के तरीके! Monsoon Disease Symptoms, Safety And Cure

मानसून का मौसम आते ही चारो तरफ हरियाली और मौसम सुहाना व खुशगवार हो जाता है! भीषण गर्मी के प्रकोप से मानसूनी बारिश की फुहारें बचाती तो है लेकिन अपने साथ सर्दी-जुखाम, बुखार और कई तरह की बिमारियां लेकर भी आती है! मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, पीलिया, डायरिया, जैसी जानलेवा बीमारियाँ ऐसे मौसम में तेजी से फैलती है!



तापमान में कमी होने से जीवाणु अधिक सक्रिय हो जाते है और शरीर पर हमला कर देते है! शरीर के कमजोर होने पर ये बीमारियाँ हावी हो जाती है! इसके पीछे रोग प्रतिरोधक श्रमता में कमी होना खास कारण होता है! साफ़ सफाई और उचित खान पान रखने से इनसे बचा जा सकता है!

1. बरसात में मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया का प्रकोप

Malaria, Dengue And Chikunguniya Mosquito Disease in Rainy Season

बरसात के मौसम में देश भर की लगभग 90% जनसँख्या मलेरिया, डेंगू, और चिकनगुनिया जैसी बिमारियों के प्रति संवेदनशील हो जाती है और इन बीमारियों का प्रकोप बढ़ने लगता है! डेंगू के मच्छर हर उस स्थान पर पनप सकते है जहाँ पर ठहरा हुआ और साफ़ पानी होता है! जबकि गन्दा ठहरा हुआ पानी मलेरिया और चिकनगुनिया के मच्छरों के बढ़ने की खास वजह होता है!

इस बीमारी के लक्षण क्या है - Symptoms of These Disease

ये बीमारियाँ होने पर रोगी को तेज कपकपी व ठण्ड का अनुभव होता है, मासपेशियो और जोड़ों में दर्द, shariyaरीर पर लाल चकत्ते पड जाना, घबराहट, मितली, कमजोरी होना, ब्लड प्लेट्लेस का तेजी से कम होना जैसे लक्षण दिखाई देते है!

मलेरिया डेंगू और चिकनगुनिया से बचाव के तरीके - Safety From Malaria, Dengue And Chikunguniya Mosquito Disease

  • अपने शरीर को पूरी तरह अच्छे से ढक कर रखें जिससे की मच्छर काटें नहीं!
  • मच्छरदानी लगाकर ही सोयें
  • किसी भी जगह पानी इकठ्ठा नहीं होने दें!
  • कूलर का पानी हर हफ्ते बदलें
  • किसी भी स्थान पर बारिश का पानी जमा नहीं होने दें!



2. डायरिया, हैजा और फ़ूड प्वाइजनिंग Diarrhea, Haija And Food Poisoning 

अक्सर बरसात के मौसम में चटपटा, तला भुना हुआ खाने का अधिक मन करता है! ऐसे में बच्चे, युवा और बड़े लोग भी बाहर सड़क किनारे पर से किसी होटल या फ़ूड स्टाल से पानी, समोसे, चाट, गोलगप्पे,पकोड़े, मोमोज, चाऊमीन, इत्यादी खाना फैशन बन गया है! ऐसे में बरसात के दिनों में इन सभी बीमारियो फैलने का अधिक खतरा होता है! बैक्टीरिया के पनपने के कारण भोजन जल्दी संक्रमित हो जाता है!

डायरिया, हैजा और फ़ूड प्वाइजनिंग के लक्षण? Symptoms of Food Poisoning From Outside or Street Food

  • उलटी होना
  • दस्त लगना
  • बुखार होना
  • पेट में दर्द
जोड़ों और मासपेशिओं में दर्द, खिचाव, और मरोड़ उठाना ये सब लक्षण एक साथ या एक एक करके भी रोगी में दिखाई पड सकते है! 

डायरिया, हैजा, और फ़ूड प्वाइजनिंग बचाव के उपाय - Remedies And Cure From 

पानी उबल के पियें और बाहर खाने से बचें, अधिक मात्रा में तरल पदार्थ का सेवन करें और रोजाना  2 से 3 बार निम्बू, चीनी, नमक और पानी के घोल का सेवन रोजाना करें!

ये उपाय करके आप बरसात या मानसून के मौसम में स्वस्थ रह सकते है और दूसरों को जागरूक भी कर सकते है!


गर्भावस्था के दौरान रक्त स्राव होने पर क्या करे? समस्या कारण और तत्काल उपाय Bleeding During Pregnancy

गर्भावस्था के समय रक्त स्राव होने का क्या अर्थ होता है? Bleeding During Pregnancy and Cure

यदि गर्भावस्था के समय रक्त-स्राव होता है तो ये अवस्था माँ और बच्चे दोनों के लिए ही खतरनाक होता है!
अगर किसी गर्भवती स्त्री को गर्भावस्था के पहले 6 महीनो में रक्त-स्राव होता है तो इसका प्रमुख कारण गर्भपात हो सकता है, और यदि रक्तस्राव 7वें महीने के बाद होता है तो इसके 2 कारण हो सकते है!
पहले है आँवल का ठीक जगह पर नहीं होना या समय से पहले अलग होने की स्थिति!

यदि प्रसव से पहले रक्त-स्राव होता है तो ये माँ और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक होता है ऐसी स्थिति में जल्द से जल्द चिकित्सीय मदद मिलना बहूत जरूरी है जिससे की स्थिति को जल्द ही संभाला जा सके अन्यथा मौत भी हो सकती है!

गर्भावस्था के दौरान रक्तस्राव का कारण - Reason of Pregnancy Bleeding

प्रसव से पहले रक्त-स्राव होने के 2 प्रमुख कारणों में पहला है गर्भाशय द्वार पर आंवल का होना! सामान्य तौर पर आंवल गर्भाशय के उपरी भाग में होता है और बच्चा नीचे की तरफ होता है! जिससे बच्चा जन्म के समय पहले बाहर आता है लेकिन ऐसी अवस्था में निचले छोर पर जन्म राह पर होती है! इसलिए ये स्थिति दर्द रहित होती है और अचानक रक्त-स्राव होने लगता है!

इस अवस्था में किसी भी प्रकार की आन्तरिक जाँच नहीं करनी चाहिए! क्योंकि इससे आंवल को नुक्सान पहुच सकता है! क्योंकि इस अवस्था में आंवल पहले ही अलग हो जाती है और उसके बाद बच्चा जन्म लेता है! इस वजह से समयपूर्व बच्चा जन्म ले सकता है इसमे बच्चे को खतरा भी होता है!

इस अवस्था में पूर्ण स्थिति के बारे में केवल अल्ट्रासोनोग्राफी से ही पता चल सकता है! यदि महिला पहली बार शिशु को जन्म देने जा रही है तो बच्चे का सर आखिरी के 2 हफ्तों में श्रोणी में पहुचता है! आंवल की ऐसी अवस्था होने के कारण शिशु के सर श्रोणी में आने में कठिनाई आती है! अगर ऐसी समस्या आती है तो जल्द से जल्द स्थिति जानने के लिए सोनोग्राफी टेस्ट और पूर्ण देखभाल की जरूरत होती है जो अच्छे अस्पताल में आसानी से हो जाती है!

दूसरी और ख़ास वजह आँवल का असमय खिसकना

इस अवस्था में आँवल अपनी सामान्य जगह पर ही होती है! लेकिन अचानक किसी वजह से अलग हो जाती है! ये समस्या गर्भावस्था के दौरान जिन महिलाओ को उच्च रक्तचाप होता है उनमे अधिक देखा गया है और कई बार पेट में कोई गंभीर चोट लगने के कारण भी ऐसा हो जाता है और दर्द के साथ योनी से रक्त-स्राव होने लगता है! रक्त स्स्राव कम या ज्यादा हो सकता है!

इसमें से केवल कुछ ही महिलाओं की योनि से रक्त निकलता है! ये समाया होने पर बच्चे को जल्दी बचाना जरूरी होता है अन्यथा गर्भ में ही बच्चे को खतरा हो सकता है और इसमे माँ ही जान को भी खतरा होता है!

इसलिए जरूरी है की किसी अच्छे से अस्पताल में जल्द से जल्द दिखाया जाये! गर्भवती स्त्री को यदि प्रसवपूर्व रक्तस्राव होता है तो प्रसव के बाद भी रक्त स्राव होने का खतरा होता है!